नौकरी से हटाए जाने के बाद पीटीआई शिक्षकों का गुस्सा बढ़ा, बीईओ ऑफिस में दिया एक दिन का सांकेतिक धरना, एसडीएम को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

समाचार निर्देश  घरौंडा प्रवीण कौशिक – माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद नौकरी से निकाले गए शारीरिक शिक्षकों (पीटीआई) में सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है। हरियाणा शारीरिक शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले शारीरिक शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने धरना देते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संघ के पदाधिकारियों ने एसडीएम कार्यालय में जाकर नारेबाजी की और प्रदेश मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि यदि शारीरिक शिक्षकों को फिर से बहाल नहीं किया गया तो सरकार को एक कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा। पीटीआई शिक्षकों द्वारा किए गए किसी भी तरह के विरोध या आंदोलन की जिम्मेदार सरकार होगी। शुक्रवार को खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सांकेतिक धरने पर बैठे पीटीआई शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता शारीरिक शिक्षक संघ के ब्लॉक प्रधान ऋषिपाल ने की। सर्वप्रथम पीटीआई ने बीईओ कार्यालय में अपना ज्ञापन सौंपा और इसके बाद नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय में पहुंचें और एसाडीएम गौरव कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ब्लॉक प्रधान ऋषिपाल, सचिव घनश्याम, विजय पाल, सुखविंद्र, राजिंद्र पहल, सुमन, वीना व अन्य ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1983 पीटीआई शिक्षकों को नौकरी से निकालने का फैसला सुनाया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पीटीआई शिक्षकों को रिलीव कर दिया है। जिस कारण अध्यापकों में जबरदस्त रोष है। उन्होंने कहा कि सरकार को कोर्ट में ना ही तो अपना पक्ष रखा और ना ही अध्यादेश लाकर पीटीआई शिक्षकों का बचाव किया। अध्यापकों के हक में सरकार को कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने चाहिए, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। शिक्षकों का आरोप है कि उनको राजनीतिक षड्यंत्र के तहत निकाला गया है, क्योंकि उनकी भर्ती वर्ष 2010 में तत्कालीन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुई थी। इसके अतिरिक्त उनके कागजातों की कई बार जांच पड़ताल हुई। जिसमें कर्मचारियों पर किसी भी तरह का दोष साबित नहीं हुआ। गलतियां चयन आयोग द्वारा की गई है और उसकी सजा शारीरिक शिक्षकों को दी जा रही है, जो न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने 10 साल तक अपनी सेवाएं दी है और बिना दोष उन्हें नौकरी से हटाना एक बहुत बड़ा अन्याय है। सरकार पीटीआई अध्यापकों के परिवारों के प्रति सहानुभूति व मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए 1983 पीटीआई की सेवाएं बहाल करें। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो शिक्षक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।

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