महिला पत्रकार को शोशल मीडिया में अपमानित कर अपना वर्चस्व कायम करना चाहते हैं तीन दलाल

समाचार निर्देश – चंद पैसों के खातिर ईमान धर्म बेचने वालों ने महिला पत्रकार की इज्जत को शोशल मीडिया में किया तार तार डाक्टर अखलाक अहमद खां खोजी सियाराम गौड़, सुनील पांडे जो कहते हैं अपने को पत्रकार कैसे लगेगी नैया पार लखीमपुर खीरी नारी के चरित्र पर किचड़ उछाल ना किसी सभ्य व्यक्ति का काम नहीं इससे वह अपनी ओछी मानसिकता का परिचय देता है जिसे समाज हरगिज़ पसंद नहीं करता है। काफी समय से शोशल मीडिया पर एक महिला पत्रकार के बारे में अशोभनीय पोस्ट लिख वायरल किया जा रहा। महिला पत्रकार न्याय के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। लेकिन न्याय नहीं मिला इस बाबत जब महिला पत्रकार से जानकारी चाही दिल दहला देने वाले तथ्य सामने आए उसने बताया की मैं गांव की रहने वाली थी शहर के जीवन से अनभिज्ञ 15 वर्ष यानी नाबालिगकी में मेरे साथ दुष्कर्म हुआ ग़रीबी लाचारी किसी चीज का ज्ञान नहीं कक्षा सात की छात्रा थाने चौकी कभी गई नहीं गई तो वहां से भगा दी गई पिता ने चुप बैठने को कहा मौसा मौसी बिक गए गांव प्रधान पति अंसार महलूद ने सुलह का दबाब बनाया चंद पैसों की लालच में गांव की बेटी के विरुद्ध गवाही दी जो झूठी साबित हुई केस फिर चालू लेकिन मेरे साथ गलत करने वाले को सजा दिलाऊगी यही प्रेरणा लेकर लड़ाई जारी रखी शहरी जीवन से अंजान कोर्ट कचेहरी गई नहीं अकेले दम पर दस साल तक लड़ती रही तरह तरह के मंजर देखें पुलिस की दरिंदगी देखी अपहरण का शिकार हुई लेकिन दूसरा विकल्प अपना न्यायालय से न्याय पाया सपा बसपा की सरकार जान का खतरा न्याय के लिए कोर्ट परिसर की टंकी पर चढ़ आत्म अत्या का प्रयास किया जान जाते जाते बची मैंने ऐसे दृष्य देखे मेरे साथ गलत करने वाले कोतवाली चौकी में बैठे चाय पीते मिले सत्ता के दम पर पुलिस ने जमकर शोषण किया लेकिन हार न मानने की हठ ने आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया एक गांव की लड़की जो शहर की गलियों को नहीं जानती थी जो लखनऊ दिल्ली हर जगह न्याय की गुहार लगाई गलत हुआ दरिंदे अमीर थे मैं गरीब इस लिए मुझे और भी कड़ा परिश्रम करना पड़ा अगर डाक्टर अखलाक अहमद खोजी वरिष्ठ पत्रकार सियाराम गौड़ राइटर सुशील पांडेय मेरा मनोबल तोड़ने मेरे चरित्र पर उंगली उठा कर शोशल मीडिया में पोस्टे वायरल कर रहे हैं तीन राक्षस बाकी लगातार लोगों का समर्थन मिलता रहा  मेरा हौसला और मनोबल बढ़ाने वाले  पिता तुल्य अधीवक्ता मिले निशुल्क केस लड़ा हाईकोर्ट में ऐसे भाई मिले जिनका आभार जीवन भर नहीं उतार पाऊंगी जिन्होंने बहन का प्यार और जीत दिलाई पढ़ाई जारी रखी बीए कर लिया , जफर अली, मुशर्रफ अली,रईस अहमद मेरे जीवन को बर्बाद करने वाले जेल गए हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा है जिसमें जफर अली मु0अ0स02076/2010 को सात साल की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना बोला गया वाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इंसाफ पाने में दस साल लगे बस अड्डो पर रात काटी भूखी प्यासी रही हत्या होते होते बची मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन द्वारा मुझे सुरक्षा भी मिली थी उसके बाद शादी न करने का प्रण लें पीड़ितो की मदद उनकी आवाज बन न्याय दिलाने की ठानी और पत्रकारिता क्षेत्र चुना चार वर्षों से एक ही पेपर में जिला प्रभारी का दावित्य निभाकर जिले में पहचान बनाई हर तरफ से समर्थन मिला लेकिन यह तीन दलाल मेरी जिंदगी के पीछे पड़ गए और इन्होंने यह बता दिया की हम कमजोरो को दबाते हैं नारी के चरित्र से खेलते हैं नीचता की हदे पार करते हैं इसलिए खोजी वरिष्ठ डाक्टर राइटर और हर खबर को झूठी है कहने वाले अपने को महान समझते हैं। मेरा मनोबल तोड़ना समाज में मुंह दिखाने लायक न छोड़ना पत्रकारिता जीवन बर्बाद कर देना इस का ठेका ले कोतवाली में अपनी पैठ बनाकर दलाली चमकाने के लिए एक नारी के चरित्र पर कीचड़ उछालने वालों से बहन बेटी कैसे सुरक्षित रहेगी यह भी एक प्रश्न है।

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