पदोन्नति में आरक्षण हटाने पर अनुसूचित जाति समाज में मनोहर सरकार के प्रति गहरा रोष

समाचार निर्देश रोहतक संजय पांचाल – पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने के आदेश वापिस ले हरियाणा सरकार : अशोक कांगड़ा अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के प्रधान अशोक कांगड़ा ने पीजीआई में हु्रई एक बैठक में कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करने से अनुसूचित जाति समाज में गहरा रोष व्याप्त है। सरकार पहले ही उनके हकों को दबाये बैठी थी और अब इस कुठाराघात से अनुसूचित जाति समाज को गहरी क्षति पहुंचेगी। प्रधान अशोक कांगड़ा ने कहा कि भारतीय संविधान में निहित अनुच्छेद 338 के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन जाति के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय संविधान में प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जन-जाति के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रपति द्वारा एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया जायेगा और इसी तर्ज पर राज्य के अंदर अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के कल्याण हेतू विभाग खोला गया। जिसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव और निदेशक को दी गई है। जोकि राज्य में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के कल्याण हेतू बनाई गई स्कीमों को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संभालता है। यह विभाग अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिये दिशा-निर्देश जारी करने हेतू राज्य में एक प्रमुख एजेंसी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता है। हरियाणा सरकार द्वारा 9 फरवरी 1979 में आरक्षण नीति तो जारी कर दी गई, जिसके अनुसार अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए सीधी भर्ती और प्रमोशन में 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। लेकिन हरियाणा में 1979 की इस आरक्षण नीति को आज तक सही ढंग से लागू नहीं किया गया और अनुसूचित जाति के लिये निर्धारित रोस्टर बिंदुओं पर सामान्य श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती की गई और अनुसूचित जाति श्रेणी के जो थोड़े-बहुत कर्मचारी भर्ती किये गए थे उनको उनकी वरिष्ठता के अनुसार सही स्थान पर न लगाकर सामान्य श्रेणी के कर्मचारियों के नीचे लगाया गया जोकि हरियाणा राज्य में अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए बड़े दुख का कारण रहा है। महासचिव कृष्ण गोछी ने कहा कि इस समस्या को दूर करने के लिए अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग हरियाणा के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल कुमार द्वारा सन 1979 में जारी आरक्षण नीति को सही ढंग से लागू करने के लिए 15 नवम्बर 2018 को दिशा-निर्देश जारी किये गए थे। लेकिन बड़े दुख की बात है कि 15 नवम्बर 2018 को जारी किये गए ये दिशा-निर्देश, इसी विभाग द्वारा 23 जून 2020 को वापिस ले लिये गए हैं और अनुसूचित जाति श्रेणी के रखवाले इस विभाग द्वारा ही अनुसूचित जाति का मजाक बनाया गया है, जिससे अनुसूचित जाति समाज में बहुत बड़ा रोष है। अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी कल्याण संघ मनोहर लाल सरकार द्वारा जारी इन निर्देशों को तुरन्त प्रभाव से वापिस लेने की मांग करता है और राज्य के हर विभाग व मांग करता है कि विश्वविद्यालयों द्वारा आरक्षण नीति रोस्टर की सही ढंग से परिपालना करने के लिए सख्त निर्देश जारी करे ताकि अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को आरक्षण का लाभ सही ढंग से मिल सके और यह वर्ग भी समाज के अन्य वर्गों के साथ-साथ मुख्य धारा में चल सके। अशोक कांगड़ा ने सरकार से मांग की कि प्रत्येक विभाग का अलग से रोस्टर ऑनलाइन बनाया जाये ताकि अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को लाभ मिल सके। बैठक में कृष्ण गोछी, राकेश बिढ़लान, राकेश कुमार, संजय पौडिय़ा, राजबीर सिंह, राजेश भौरिया, अजीत कुमार, मनीष रंगा, मुकेश कुमार, अशोक कुमार, चांद वैद्य आदि मौजूद रहे।

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