समाचार निर्देश एस डी सेठी – महाराष्ट्र के बाद अब राजस्थान में सियासी उठापटक की शुरूआत हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पाललट की जंग फिर सतह पर दिखाई देने लगी है।. इस सियासी अखाडे में चारों तरफ शक्ति बटोरती भाजपा भी कूद चुकी है। कुल मिलाकर प्रदेश की सियासत महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की तरह ही गरमा गयी है। अगर वजह को टटोले तो राजस्थान में अगले साल यानि 2023 में होने वाले चुनाव में बडा ही उलटफेर होने वाला है। राजस्थान में सियासी आग में घी उडेलने का काम केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद सिंह शेखावत के 19 जून को एक जनसभा के दौरान दिये एक बयान ने बखेडा खडा कर दिया है। शेखावत ने सचिन पायलट के बागी होने की बात का जिक्र किया। कहा कि उस समय सचिन पायलट से चूक हो गई। राजस्थान के विधायक मध्यप्रदेश जैसा फैंसला नहीं ले पाये। इतने बोल ही सियासी भट्टी सुलगाने को काफी थे। इस आग में सचिन पायलट समेत अशोक गहलोत, को लपेटते हुए शेखावत ने ये तक कह डाला कि सरकार गिराने के षड्यंत्र में सचिन और गहलोत दोनों को शामिल बताया। मामले ने तूल जब पकडा जब कांग्रेस के प्रमोद कृष्णम ने अपने ट्विट में लिखा कि विषपान करने वाले नील कंठ का अभिषेक “श्रावण” मास में किया जाता है। इसके बाद सचिन पायलट के दरबारी विधायक इंद्रराज गुर्जर ने पलटवार कर इशारों में अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए ट्वीट में कहा कि जमीन पर बैठा हुआ आदमी कभी नहीं गिरता फिक्र उन्हीं को है जो हवा में है। सचिन पायलट ने 27 जून को बयान जारी कर कहा कि अशोक गहलोत मेरे पितातुल्य है। मेरे बुजुर्ग हैं। उनकी बात का मैं बुरा नहीं मानता। वे पहले भी मुझे निकम्मा, नालायक कह चुके हैं। मेरा फोकस तो 2023 के चुनाव जीतने पर है। अगर कांग्रेस में उन्हें बडी जिम्मेदारी नहीं मिलती तो वह फिर से बगावत कर सकते हैं। वह कांग्रेस से अलग होने के बाद पायलट नई पार्टी का भी ऐलान कर सकते हैं। ज्ञात हो कि राजस्थान में 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 100 और भाजपा ने 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अब हालांकि पायलट डिप्टी सीएम से भी हटा दिये गये हैं। तब से अब तक अशोक गहलोत के करीबी पायलट पर जहरीले तंज कसने से भी नहीं चूकते। अगले विस चुनाव में तगडा ही बिगुल बजने वाला है। जिसमें सचिन पायलट, अशोक गहलोत और भाजपा ही आमने सामने दिख जायें तो कोई हैरानी नहीं होगी।

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