उतरन शब्द वो शब्द है जो अमीरों के शब्दकोष में घिनता से भरा शब्द है , परंतु यही उतरन शब्द गरीबों के शब्द कोष में बहुत ही महत्वपूर्ण, उपयोगी , लाचारी , भरा शब्द है । उतरन वह है जो अमीरों की जिंदगी में जो चीज उनके दिल को न भाए उसे छोड़ देना उसका इस्तेमाल नहीं करना यही उतरन है , जबकि गरीबों के लिए यही अमीरों के द्वारा छोड़ी गई चीजें जो उतरन कहलाती हैं बहुत ही उपयोगी होती है गरीब तो मिली हुई उतरन को भी बहुत ही सहज के रखता है , जब किसी अमीर के बेशकीमती कपड़ों पर एक दाग भी लग जाता है तो अमीर उस कपड़े को अपनी शांति खिलाफ बताता है , जबकि गरीब यदि किसी कपड़े पर एक या दो दांत भी हो गए हो तो उसे नजरअंदाज करते हुए अपने पैर सीमा अनुसार पसार कर सम्मान पूर्वक उस उतरन को भी धारण कर लेता है । हाल ही में देखा गया कि कोरोना काल जैसी महामारी में कैसे गरीब लोग खाने की एक-एक दाने के लिए तरस रहे थे उनके बच्चे भूख से बिलख रहे थे जहां कहीं भी उन्हें पता चलता कि कहीं पर भोजन बट रहा है तो वह चल देते उसी तरफ अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने परिवार के भूख की परवाह करते हुए । वही एक और देखा गया कि लॉकडाउन में जहां गरीब एक-एक दाने के लिए तरस रहे थे वही बहुत से घर के लोग अपने घर में सुकून से रह कर जैसे महामारी में भी छुट्टियों का लुफ्त उठा रहे थे और बेशकीमती पकवानों के साथ अपने घर में परिवार संग जैसे पिकनिक मना रहे थे , लॉकडाउन में जब टेलीविजन पर महामारी के समय का हाल देखा , तो भी लोगों को अधिक फर्क नहीं पड़ा उन्हें भोजन की कपड़ों की कोई कदर नहीं हूं जैसे ही लॉकडाउन खुला देखा गया कि शादियों में फिर खुलेआम पैसा लुटाया जा रहा है अनगिनत पकवान बनवाए जा रहे हैं जिसमें से कितना ही स्वादिष्ट पकवान बस भी जाता है साथ ही कितने लोग खाने की थाली में झूठ छोड़ते हुए फेंकने के लिए थालियां छोड़ देते हैं । यही वह अन्य है जिसके एक-एक दाने के लिए तरसते हुए लोगों को हमने टेलीविजन पर देखा है लॉकडाउन के चलते ही कितने लोगों की आजीविका उनके हाथ से छूट गई कितने लोग लॉकडाउन के बाद आर्थिक तंगी के चलते डिप्रेशन में आ गए और कितने लोगों ने तो गलत निर्णय लेते हुए अपनी कीमती जिंदगी को खत्म ही कर डाला । मानती हूं कि इस समय बहुत से अमीर होने लोगों की सेवा के लिए आगे हाथ बढ़ाएं दान वीरों ने दान भी किया परंतु अमीरों के लिए जैसे उनकी बेशुमार दौलत में से एक चुटकी मात्र ही निकल पाया हो और उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा है परंतु एक गरीब के लिए वह छुटकी मात्र सहयोग भी लाखों के बराबर था और सदैव बराबर रहेगा , एक गरीब उतलन में मिले हुए जूते चप्पल कपड़े इत्यादि वस्तुओं को शान से पहन कर दुनिया को दिखाता है अब खुश होता रहता है स्वयं को देखकर परंतु यही उत्तरण अमीरों के लिए कचरा होती उत्तरण का महत्व सिर्फ एक गरीब ही बता सकता है उसके लिए बेशुमार दौलत समान ही है।।वीना आडवाणी तन्वीनागपुर, महाराष्ट्र।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.