डायवर्टिज! सुनने में तो नई बीमारी है, लेकिन डायबिटीज से एकदम अलग है।  वैसे तो दोनों आम बीमारी लगते हैं, लेकिन लोग कभी महसूस नहीं कर सकते हैं कि उन्हें डायवर्टिज पहले हुआ या डायबिटीज। लोग डायबिटीज के कम डायवर्टिज के अधिक शिकार होते जा रहे हैं। डायबिटीज एक चयापचय विकार है जिसे उच्च रक्त शर्करा के स्तर से पहचाना जाता है। रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि से महत्वपूर्ण अंगों के साथ-साथ इंसानी शरीर के अन्य अंगों को नुकसान होता है, जिससे अन्य संभावित स्वास्थ्य बीमारियाँ होती हैं। जबकि डायवर्टिज की बीमारी ‘डायवर्ट’ करने से होती है। लोग भूख से मर रहे हों तो उन्हें मंदिर-मस्जिद, महंगाई बढ़ रही हो तो शिवलिंग और चुनाव समीप हो तो सरहद पर माहौल गरमाकर मुद्दे को डायवर्ट कर दो, आदमी ससुरा खुद-ब-खुद डायवर्टिज का शिकार होकर झोला उठाकर चल देता है।  

डायबिटीज के ज्यादातर सामान्य लक्षण हैं थकान, जलन, तनाव, थकान, बार-बार पेशाब आना और सिरदर्द जिसमें ताकत और स्टैमिना कम होना, वजन कम होना, भूख का बढ़ना आदि। जबकि डायवर्टिज में ऊटपटांग बातें करना, महंगाई का नाम लेते ही गोमूत्र पीने को कहना, विकास के नाम पर शहरों के नाम बदल देना, गिरते रुपए की बात उठे तो हनुमान चालीसा पढ़वा देना, जहाँ दाल न गल रही हो वहाँ सीबीआई को भेज देना, कोई देश के कर्ज के बारे में बात करे तो उसे देशद्रोही घोषित कर देना आदि इसके लक्षण हैं।  

ड़ायबिटीज में ब्लड शुगर लेवल दो प्रकार के होते हैं- फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल और पोस्टप्रैंडियल ब्लड शुगर लेवल। आम तौर पर इसे रात भर के उपवास के बाद मापते हैं। डायवर्टिज में खून ‘मापने’ की जगह ‘बहाने’ पर विश्वास किया जाता है। बहने वाला खून कितने काम का है इसकी जाँच चुनाव में पड़ने वाले वोटों से की जाती है। गौरतलब है कि खून बहाने वाले डायवर्टिज प्रेरक अपने खून को इन खूनों से दूर रखते हैं। इनके लिए अपना खून, खून और गैरों का पानी होता है।   

डायबिटीज गंभीर स्वास्थ्य परिणामों का कारण बनता है और यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित करता है। रक्त में अत्यधिक ग्लूकोज गुर्दे, रक्त वाहिकाओं, त्वचा को नुकसान पहुँचाता है जिसके परिणामस्वरूप हृदय, त्वचा और अन्य रोग होते हैं। इससे किडनी को नुकसान पहुंचता है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में अशुद्धियों का संचय होता है। डायवर्टिज बीमारी दलाल समाचार पत्रों, चैनलों और व्यापारियों के भड़काऊ शर्करा के कारण होती है। यह बीमारी किसी एक को न होकर पूरे समाज को होती है। ऊपर से मीठी बात करना, भीतर से आग लगाना और समाज के सारे अंग खराब कर विद्वेषों का संचार करना इस बीमारी के सामान्य लक्षण हैं।   डायबिटीज में दिल की बीमारी हो सकती है, जबकि डायवर्टिज में सर्वांग बीमारी होती है। आदमी डायबिटीज के साथ तो रह सकता है, लेकिन डायवर्टिज के साथ कतई नहीं। आजकल डायवर्टिज महामारी का रूप धारण कर चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि सभी अपने-अपने घरों की खुदाई कर पूर्व जाँच कर लें, अन्यथा कोई धार्मिक प्रतीक निकलने पर उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया जाएगा। यह एक गंभीर जानलेवा बीमारी है और इससे बचने के लिए महंगाई, भुखमरी, बेरोजगारी दवाइयों की नियमित डोज की आदत डाल लेनी चाहिए। इससे शरीर में देशभक्ति का खून सुचारू रूप से दौड़ने लगता है। जो व्यक्ति डायवर्टिज से दूर रहता है वह डायबिटीज तो क्या कैंसर और एड्स जैसी बीमारियों पर भी विजय प्राप्त कर लेता है। डायवर्टिज से बचने की कोई दवा नहीं है, केवल उसे वोट देकर उसकी मनमानी सहने की आदत डाल लेनी चाहिए, इससे अल्पायु दीर्घायु हो सकती है। 

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त

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