हम सभी चाहते हैं हमारे घर का वातावरण हंसी – खुशी से भरा और प्रफुल्लित हो। सबके चेहरे पर प्यार की चमक हो। सभी एक दूसरे का सन्मान करे और घर में किसी भी तरह का मानसिक तनाव और क्लेश नहीं हो ,लेकिन कई बार ऐसा होता नहीं है। पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि कुंडली का चतुर्थ घर व्यक्ति के ज़ीवन में मिलने वाले सुख, खुशियों, सुविधाओं, तथा उसके घर के अंदर के वातावरण अर्थात घर के अन्य सदस्यों के साथ उसके संबंधों को भी दर्शाता है। मानसिक शान्ति तथा व्यक्ति के स्वभाव पर भी चतुर्थ भाव का विशेष प्रभाव होता है।किसी व्यक्ति के जीवन में वाहन-सुख,नौकरों-चाकरों का सुख, उसके अपने मकान बनने या खरीदने जैसे भावों को भी कुंडली के इस घर से देखा जाता है। पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि कुंडली में चतुर्थ घर के बलवान होने से तथा किसी अच्छे ग्रह के प्रभाव में होने से कुंडली धारक को अपने जीवन काल में अनेक प्रकार की सुख-सुविधाओं तथा ऐश्वर्यों का भोग करने को मिलता है तथा उसे बढिया वाहनों का सुख तथा नए मकान प्राप्त होने का सुख़ भी मिलता है।कुंडली के चतुर्थ भाव के कमजोर अथवा किसी बुरे ग्रह के प्रभाव में होने की स्थिति में व्यक्ति के जीवन काल में सुख-सुविधाओं का आम तौर पर अभाव ही रहता है या सब कुछ होते हुए भी मानसिक अशांति बानी रहती है । इस घर पर किन्हीं विशेष बुरे ग्रहों का प्रभाव होने से कुंडली धारक के अपने रिश्तेदारों के साथ संबंधों में भी तनाव आ सकता है। पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि मंगल भूमि का कारक होता है। यदि जातक की कुंडली में मंगल चतुर्थ भाव में दुष्ट प्रभाव में है तो भी व्यक्ति की जमीन जायदाद के कारण मानसिक शांति प्रभावित होती है। शुक्र को भी चतुर्थ भाव का कारक माना जाता है। शुक्र चतुर्थ भाव में वाहन सुख साधनों को प्रदर्शित करता है। यदि जातक की कुंडली में शुक्र पाप प्रभाव में हो तो व्यक्ति की मानसकि शांति वाहन तथा अन्य भौतिक सुख-सुविधा के साधनों के कारण प्रभावित होती है।पंडित कृष्ण मेहता ने बताया किजातक मानसिक शांति, भौतिक सुख-साधनों को तभी भोग सकता है जबकि उसका चतुर्थ भाव तथा चतुर्थ भाव का स्वामी तथा कारक ग्रह किसी भी दुष्ट प्रभाव में न हों। शुभ ग्रहों का प्रभाव चतुर्थ भाव में होने से व्यक्ति खुश मिजाज, मिलनसार और उत्साह से परिपूर्ण होता है तथा माता, वाहन, मकान तथा भौतिक सुखों की प्राप्ति करता है। व्यक्ति अच्छे चरित्र का तथा मानसिक रुप से संतुलित होता है पंडित कृष्ण मेहता ने बताया किआधुनिक समय में लोग वास्तु के नियमों की अवहेलना करके घर का निर्माण करते हैं और घर की साज-सज्जा भी इस प्रकार करते हैं जिससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की हर वस्तु हमें पूरी तरह प्रभावित करती है , इसका प्रभाव न सिर्फ आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य पर पड़ता है बल्कि इससे रिश्ते भी प्रभावित होते हैं।पंडित कृष्ण मेहता ने बताया किआधुनिक समय में लोग वास्तु के नियमों की अवहेलना करके घर का निर्माण करते हैं और घर की साज-सज्जा भी इस प्रकार करते हैं जिससे वास्तु दोष उत्पन्न होता है। इसका प्रभाव न सिर्फ आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य पर पड़ता है बल्कि इससे रिश्ते भी प्रभावित होते हैं। पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि गलत वास्तु का प्रभाव शादी शुदा संतान के जीवन को भी प्रभावित करता है. वास्तु दोष व्यक्ति को गलत मार्ग की ओर अग्रसर करते है..वास्तु दोष सबसे पहले मन और दिल को प्रभावित कर बुद्धि को भ्रष्ट कर देते है।वास्तु के सिद्धांतों का पालन करते हुए शक्ति तथा अनेक अदृश्य ब्रह्मांडीय तत्वो के शुभ परिणाम प्राप्त कर सकते है. और अनिष्टकारी प्रभावों से अपनी रक्षा होती है।कितनी रखें भवन की ऊँचाई: पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि चारदीवारी- मकान में चारदीवारी का निर्माण करते समय हमेशा ध्यान रखें कि दक्षिण-पश्चिम दिशा की चारदीवारी उत्तर व पूर्व दिशा की अपेक्षा मोटी व ऊँची रखें।निर्माण कार्य चरणों में- यदि मकान में निर्माण कार्य चरणों में संपन्न कराने की योजना है, तो वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार ही संपन्न कराएँ। वास्तु के अनुसार सर्वप्रथम पश्चिम या दक्षिण दिशा में निर्माण कार्य करवाएँ।मकान की ऊँचाई- वास्तु के अनुसार किसी मकान की ऊँचाई कितनी होनी चाहिए, इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। ऊँचाई का हिसाब निकालने के लिए मकान की चौड़ाई के 16वें भाग में चार हाथ, 96 अंगुल जोड़कर जितना योग हो, उसके बराबर ऊँचाई होनी चाहिए।यदि बहुमंजिली मकान की योजना हो तो पहली ऊँचाई में से 12वाँ भाग कम करके दूसरी मंजिल की ऊँचाई रखें। यही क्रम तीसरी व क्रमशः चौथी मंजिल के लिए भी रखें। तीसरी मंजिल के लिए दूसरी मंजिल से 12वाँ मान कम करें। प्रत्येक मंजिल के लिए यह सामान्य क्रम ऊँचाई के लिए है।यदि इस क्रम से 4, 31/2 , 3 हाथ जोड़ दें, तो यह ऊँचाई उत्तम मध्यम, कनिष्ठ तीन प्रकार की होगी। यदि इस क्रम में भी क्रमशः 4 हाथ में 20, 18, 16, अंगुल तथा 31/2 और 3 हाथ में 27, 21, 15 अंगुल और जोड़ें, तो उत्तम, मध्यम और कनिष्ठ ऊँचाई के तीन-तीन भेद और हो जाएँगे। इस प्रकार कुल 12 भेद होंगे। इनमें 8वाँ व 10वाँ भेद समान होने से 11 भेद ही माने जाएँगे। भवन में ऊँचाई का हिसाब इस तरीके से ही रखना शुभ होता है।वास्तु के अनुरूप बनाएँ बेडरूम: पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि बेडरूम वो जगह है, जहाँ दंपत्ति एक-दूसरे के साथ अंतरंग पल गुजारते हैं। पति-पत्नी के प्यार का साक्षी यह कक्ष ऐसा होना चाहिए, जिसमें प्रवेश करते ही उन्हें एक असीम शांति का अनुभव हो।आपका बेडरूम यदि वास्तु के अनुरूप हो तो वह आपके संबंधों व कार्यशैली पर भी प्रभाव डालेगा। मधुर दांपत्य जीवन व पावारिक कलह से निजात पाने के लिए बेडरूम को बनावट व साज-सज्जा वास्तु के अनुरूप होनी चाहिए।यदि हम रात को चैन की नींद सोते हैं तो हमारा दिनभर अच्छा गुजरता है परंतु कई बार बिस्तर पर करवटें बदलने में ही हमारी रात गुजर जाती है और तनाव में पूरा दिन बीत जाता है।पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि वास्तु के अनुसार यह सब कुछ बेडरूम की दिशा सही नहीं होने से होता है।कभी भी बेडरूम में बेड के सामने टीवी या ड्रेसिंग टेबल नहीं होना चाहिए। वास्तु के हिसाब से यह अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति का आभास होता है। पंडित कृष्ण मेहता ने बताया कि दीर्घकालीन दांपत्य सुख की प्राप्ति के लिए गृहस्वामी का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा में होना चाहिए। गृहस्वामी के बेडरूम को ‘मास्टर बेडरूम’ कहते हैं। यह कक्ष आयताकार तथा उसमें अटैच लेट-बाथ उत्तर-पश्चिम दिशा में होना वास्तु के अनुसार अच्छा होता है।

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