समाचार निर्देश एस डी सेठी – केंद्र सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जून को बडे गाजे बाजे के साथ सेना में नई भर्ती के नाम पर अग्निवीर स्कीम की घोषणा की थी। इस स्कीम को बडे स्तर पर मीडिया में प्रचार कर डेढ साल में 10 लाख रोजगार मुहैया कराने का रोड मैप जारी किया है। 4 साल के लिए सेना में भर्ती का प्लान सिरे चढते दिखाई नहीं दे रहा है। स्कीम घोषणा के महज कुछ घंटों के बाद बिहार से विरोध की चिंगारी सुलग गई है।. वजह साफ है कि सेना में भर्ती का इंतजार कर रहे छात्रों का सब्र का बांध टूट गया है। ये लोग 2 साल से इंडियन आर्मी में बहाली रिक्रूटमेंट नहीं निकली है।

बेरोजगारी और उम्र सीमा को टापने की मार का गुस्सा सडकों पर फूट पडा। और बिहार के बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, बक्सर में भर्ती के खिलाफ धरना, प्रदर्शन, रेलवे ट्रैक, और नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की अग्निवीर स्कीम को सवालों के बवंडर में खडा कर दिया है। विशेषज्ञों का जीवट सवाल है कि महज 3 महीने में सैनिक हथियार, टैंक, आरटिलरी, मिसाईल यूनिट्स में कैसे ट्रैंड हो पाएगें। वहीं स्थायी नौकरी न होने पर पूरा डेडीकेशन और ज्बा कैसे आएगा। इसके अलावा सेना में 4 साल के सिपाही, अफसर बोले 6 महीने की ट्रैनिंग में दुश्मन को कैसे धूल चटाएगें। जबकि जवान ही 5 साल में तैयार होता है। ऐसे कई सवालों से घिरी अग्निवीर स्कीम पर नये सिरे से सोचने समझने की जरूरत है। सरकार पैंशन, सैलरी और अन्य खर्चों में कटौती करके देश की सुरक्षा और नौजवानों के जज्बें को कम करने की कवायद पर सरकार को पुनः आंकलन करने की जरूरत है।

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