समाचार निर्देश ब्यूरो एस डी सेठी – कोरोना महामारी में लाॅकडाउन के दौरान से शुरू किये गये मुफ्त राशन या सस्ता राशन वितरण  को मुफ्तखौरों ने कमाई का धंधा बना लिया है। फ्री में मिल रहे गेहूं, चावल को सरेआम घर मौहल्लों में फेरी लगाने वालों को बाकायदा 15से 17 रूपये किलो में बेचा जा रहा है। इस धंधे में आटा चक्की वालों के भी पौं बारह हो रहे हैं। इस संवाददाता ने ऐसा ही एक फेरी वाले  शीबू  को जो समान ढोनें वाले रिक्शे में गेंहूं व चावल से भरे बोरे लादें  गेंहूं चावल बेचों 15 रुपये किलो की माईक से अवाज लगा रहा था। उसको रोका और पूछा? भाई समान बेचने की बजाय तुम गेंहू, चावल को खरीद रहे हो। बोला जी सर। हम लोग फेरी लगाकर लोगों से गेंहूं चावल 15 रुपये किलो के भाव से ले रहे हैं। इस संवाददाता ने पूछा भाई इनके पास  बेचने के लिए ये गेंहुं चावल कहां से आता है? इसके जवाब में उसने बताया कि बेचने वालो के पास सरकार से पिछले दो तीन साल से मुफ्त में  या सस्ता राशन की मात्रा मिल रही है। वो  ही गेहूं चावल हम15 रूपये किलो के भाव से खरीदते हैं। एक दिन में कितना गेहूं चावल  इकठ्ठा कर लेते हो पर शीबू ने जो बताया,सुनकर  होश फाकता हो गये। शीबू ने खुलासा करते हुए बताया सर  3 से 4 क्विंटल के करीब रोज गेंहूं चावल खरीदते हैं। अच्छा तो बताओ इस  गेंहूं का  करते क्या  हो ? शीबू ने तपाक से बताया सर आटा चक्की वाले हमसे 20 रूपये किलों में खदीद लेतें हैं। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक दिन में एक फेरी वाला लगभग 3 से  4 क्विंटल गेंहूं लेता है, तो महीने के 120 क्विंटल गेंहूं का सौदा कर रहा है। वहीं चावल का हिसाब अलहैदा है। सालों से चल रहे इस गौरख धंधे पर राशन वाले आटा चक्की वाले और फेरीवालों के  मकड़जाल से सरकार अभी तक अनभिज्ञ कैसे  है। सवाल खडे करता है। सरकार को तुरंत मुफ्त राशन और सस्ता राशन लेने वालों  की  जांच करनी चाहिए। और फ्री या सस्ता राशन योजना के अपात्रों पर शिकंजा कसना चाहिये। उनसे ऐसे लोगों का राशन कार्ड केंसिल कर कानूनी कारवाई भी करनी चाहिये। 

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