समाचार निर्देश ब्यूरो एस डी सेठी – काशी, वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में कोर्ट ने फैसला दे दिया है। अब कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा, तो रहेगें ही इनके अलावा अन्य  कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह  की न्युक्ति कर दी है। इससे पहले कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा को  हटाने की याचिका मस्जिद पक्ष की ओर से दायर की थी। जिस पर कोर्ट ने अजय  मिश्रा को हटाने की बजाये एक और कोर्ट कमिश्नर की न्युक्ति कर दी।कोर्ट ने कथित  मस्जिद परिसर की वीडियोग्राफी करने समेत बंद ताले को खोलने के साथ ताले न खोलने न देने की सूरत में   ताले तोडने तक  के आदेश भी दिये है। कोर्ट के मुताबिक विडियोग्राफी की कारवाई सुबह 8 बजे से 12 बजे तक का समय निश्चित किया है। इस बीच काम में बाधा, डालने व  रोकने उडधंगियों  के  खिलाफ जिलाधिकारी को सिक्योरिटी, बल इस्तेमाल कर कढी कारवाही करने  की हिदायत दी है।अदालत ने  कोर्ट कमिश्नर को 27 मई को अपनी रिपोर्ट जमा करने के आदेश जारी कर दिये है। ज्ञात हो कि वादी हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी परिसर के अंदर सर्वे कराये जाने की मांग अदालत से की थी। जिस पर अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से बुद्ववार तक का समय मांगा था। जब 6 मई से ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे के लिए अदालत की तरफ से नियुक्त किए गए कोर्ट कमिश्नर अजय मिश्रा की  निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए। बडा हंगामा हुआऔर सर्वे को रोक दिया गया था। अब कोर्ट ने इसी मामले पर सर्वे समेत फोटोग्राफी करने के आदेश के साथ ताले में बंद  तहखाने को खोलने और फोटोग्राफी करने के आदेश दिये हैं। इस मस्जिद का निर्माण  कथित 1664 में मुगल शासक ओरंगजेब ने करवाया था। और औरंगजेब ने वो मंदिर ध्वस्त कर उसके अवशेषों का इस्तेमाल कर इस मस्जिद का निर्माण करवाया। इस मामले में साल 1991 में सोमनाथ व्यास, रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय ने वादी के तौर पर प्राचीन मूर्ति  स्वयंभू भगवान विशेश्वर की ओर से मुकदमा दायर किया था 1991 से यह मामला अदालत में है। लेकिन मां श्रंगार गौरी का मामला 7-8 महीने पुराना है। 18 अगस्त 2021 में वाराणसी की कोर्ट में यहां की 5 महिलाओं ने मां श्रंगार गौरी के मंदिर में पूजा अर्चना की मांग की। इसी कडी में कोर्ट ने श्रंगार गौरी की मूर्ति और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में विडियोग्राफी कराकर सर्वे रिपोर्ट देने को कहा था और इसी से  हंगामा छिड गया। 

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