समाचार निर्देश ब्यूरो एस डी सेठी – राष्ट्रपति पद के चुनाव की घोषणा के बाद, ममता बनर्जी विपक्ष को साधने में लगी है।  वह 17 दलों के नेताओ के बूते शरद पवार के सिर पर राष्ट्रपति का सेहरा बंधवाना  चाहती हैं। मगर पवार ने  राष्ट्रपति का प्रत्यक्षी बनने से साफ  इन्कार कर दिया है। शरद पवार एक मजे हुए सियासतदान है। उनके मोदी से अच्छे संबंध के साथ- साथ आरएसएस (संघ) से भी बहुत अच्छे रिश्ते हैं। वहीं सारा विपक्ष भी एक जुट नहीं हैं। इसलिये पवार अपने संबंध बिगाड़ने के  बजाये बैकफुट पर  हो गए। शरद पवार के मैदान छोडने के बाद अब अगले हफ्ते  दूसरे नाम पर चर्चा के लिए विपक्षी दलों की दिल्ली में फिर से बैठक होगी। आंकडों के तिगडम से  लोकसभा में विपक्ष काफी कमजोर है, जबकि राज्यसभा और विधानसभाओं में मजबूत स्थिति में है। वैसे भी पवार सक्रिय राजनीति में है। तो वह अपनी पार्टी के लिए बखेडा  खडा करना नहीं चाहते। क्योंकि हारने की हालत में  2024 के चुनाव में उनकी पार्टी को नुकसान झेलना पड सकता है। ज्ञात हो कि ममता ने गैर भाजपा दलों के 22 नेताओं जिसमें 8 राज्यों के सीएम और सोनिया गांधी को भी चिट्ठी लिखी थी। लेकिन बैठक में 17 ही आए। इनमें कांग्रेस, टीएमसी, सीपीआई, शिवसेना, एनसीपी, राजद, सपा, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, जद(एस,), डीएमके, आरएलडी, आईयूएमएल, और झामुमो, शामिल थे। और चार बडे दलों  जिनमें आम आदमी पार्टी, बीजेडी, अकाली दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, ने बैठक से दूरी बनाए रखी। ममता की इस पहल  को जानकार लोग इसे  जल्दबाजी में उठाया हुआ कदम बता रहे हैं। उनका मानना है एनडीए प्रत्याशी उतारने के बाद विपक्ष को अपना प्रत्याशी तय करना चाहिये। उल्लेखनीय है कि देश में राष्ट्रपति के चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है। 18 जुलाई को मतदान होना है। और नतीजे 21 जुलाई को आएगें। चुनाव में कुल 4809 सांसद और विधायक वोट करेंगें। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। उससे पहले देश को अपना 16 वां राष्ट्रपति मिलना है। 

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