समाचार निर्देश ब्यूरो एस डी सेठी – केंद्र की मोदी सरकार  रोजगार और नौकरी की टैंशन से मुक्ति दिलाने की गर्ज से अब शहरों में भी मनरेगा जैसी स्कीम पेश कर सकती है। मोदी सरकार का मानना है कि देश के लिए पैट्रोल और डीजल, एलपीजी, सिलेंडर, खाने के तेल, नीबूं, टमाटर आदि की ऊंची कीमतें ही सिर्फ एकमात्र समस्या नहीं है। बल्कि रोजगार भी एक बडी समस्या है। इतनी छोटी सी बात अब जाकर कारिंदो को समझ आई है। केंद्र और राज्य सरकार  ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी देने का हर संभव प्रयास कर रही है। उधर इस बीच अब प्रधान मंत्री की इकोनोमिक एडवाईसरी कमेटी (ईएसआई-पीएम) ने एक नई योजना शुरू करने का सुझाव दिया है। (ईएसी-पीएम) ने सरकार को शहरी बेरोजगारों के लिए रोजगार गारंटी योजना लाने की सलाह दी है। वहीं कमेटी ने भारत में लोगो की इन्कम में असमानता को कम करने के लिए एक यूनिवर्सल बेसिक इन्कम (यूबीआई) पेश करने का भी सुझाव दिया है। साथ ही समाजिक क्षेत्र के लिए ज्यादा धन आवंटित करने की भी सिफारिश की गई है। परिषद के चेयरमैन विवेक देवराय ने एडवाईज दी है कि शहरी और रूरल क्षेत्रों में श्रमबल की भागीदारी दर के बीच के अंतर को देखते हुए मनरेगा जैसी स्कीम को शहरों में पेश किया जाना चाहिये। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को दोबारा से काम दिया जा सकता है। इसी कडी में परिषद ने सरकार को सामाजिक सेवा सेक्टर में खर्च के लिए उच्च आवंटन करना चाहिये। वह सबसे ज्यादा जरूरी है। इससे सबसे कमजोर आबादी को भी किसी झटके से निबटने के लिए जुझारू बनाया जा सकता है। इससे लोगों को गरीबी में जाने से रोका जा सकता है। 

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