नई दिल्ली – आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी ) पर दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, मैक्समूलर मार्ग में भारत की सबसे रणनीतिक दो दिवसीय शिखर बैठक सिनर्जी समिट का आयोजन हुआ। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वीडियो संदेश के माध्यम से जुड़े और अपने विचार व्यक्त किए । इस समिट का उद्घाटन मुख्य अतिथि मालदीव गणराज्य के शिक्षा राज्य मंत्री डॉ अब्दुल्ला रशीद अहमद द्वारा किया गया । इस अवसर पर देवी संस्थान की फाउंडर एंड सीईओ डॉ. सुनीता गांधी, एम3एम फाउंडेशन की ट्रस्टी डॉ. पायल कनोडिया, एम3एम फाउंडेशन के प्रेसिडेंट डॉ. ऐश्वर्य महाजन, निक्सोन जोसेफ, सीईओ, सीएलटी इंडिया, आलोक वर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एचसीएल फाउंडेशन, थिरुमाला आरोही, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, हेड-एजुकेशन, ट्रेनिंग एंड असेस्मेंट्स, इंफोसिस लिमिटेड, कमल गौर, डिप्टी डायरेक्टर, प्रोग्राम्स एजुकेशन, सेव द चिल्ड्रेन और एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आज इस समिट का दूसरा और अंतिम दिन रहा।

दो दिवसीय इस समिट में विभिन्न संथाओं द्वारा फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी  पर चर्चा की गई। वहीं इस अवसर पर डॉ. पायल कनोडिया ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि एम3एम फाउंडेशन अपने विभिन्न प्रोग्रामों के माध्यम से फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी  पर किस तरह पहले से ही काम कर रहा है और बुनियादी शिक्षा के साथ देश के बेहतरी में अहम योगदान दे रहा है। एम3एम फाउंडेशन के सफल प्रयासों को देखते हुये एम3एम फाउंडेशन को एक और नई ज़िम्मेदारी मिली है।

ज्ञात हो की देश के कई हिस्सों में अभी भी फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी  पर काम करने की जरूरत है और इसी को देखते हुये एम3एम फाउंडेशन ने देवी फाउंडेशन के साथ मिलकर शामली के 10 चिन्हित स्कूलों में एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी ) के कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिए एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते के तहत एम3एम फाउंडेशन अपने साक्षर प्रोग्राम के तहत शामली में कार्य करेगा।

इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह वीडियो सन्देश के माध्यम से जुड़ें एवं समिट की सराहना करते हुए  कहा की, “शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह के आयोजन को मैं निवेश की तरह देखता हूँ जो रिटर्न के रूप मे आने वाले समय में शिक्षा के बेहतरी का मार्ग प्रशस्त करते है। एक पुरानी कहावत है जीवन सवांरना है तो व्यवसाय में निवेश करना चाहिए, पर पीढ़ियाँ सवांरना है तो शिक्षा में निवेश करना चाहिए। ऐसे में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आप सभी प्रबुद्ध लोगों द्वारा समृद्ध रूप से  किया जा रहा यह निवेश भविष्य के दृष्टि से निश्चित ही अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीनर्जी समित की जो थीम है वो बड़ा ही महत्वपूर्ण है। भारत को नॉलेज इकॉनमी में बढ़ना है, नॉलेज सोसाइटी बनाना है तो फाउंडेशनल उसका सबसे पहला और आवश्यक कदम होगा, ऐसा मै मानता हूँ। भारत देश की वास्तविक स्थिति देखें तो हमारी आजादी के 75 वर्ष के बाद भी विभिन्न कारणों से हम फाउंडेशनल लिटरेसी में एक आदर्श स्थिति तक नहीं पहुँच पाये हैं। नामांकन दर  में तो बढ़ोतरी हुई है पर बच्चों में बेसिक लिटरेसी और न्यूमेरेसी  स्किल्स विकसित कर पाने में हम उस हद तक सफल नहीं हो पाये जितना हमें हो जाना चाहिए था। विभिन्न आंकड़े बताते हैं की ग्रामीण सरकारी स्कूल में पाँचवी क्लास के बच्चों में फाउंडेशनल लिटरेसी स्किल्स का अभाव देखा गया और पिछले दो वर्षो में कोविड के दौरान यह स्थिति और भी खराब हुई है। ऐसे में शिक्षा के क्षेत्र में आज एक कठिन परिस्थिति बनी हुई है, जिससे निपटने की जरूरत है। हमें ऐसे प्रयासों की जरूरत है जो फाउंडेशनल लिटरेसी को न केवल प्री पेंडेमिक स्थिति में बल्कि उससे कही ऊपर पहुंचा सके। इस दिशा में मै सुनीता गांधी जी को उनके कांसेप्ट और प्रोग्राम, एक्सेलेरेटिंग लर्निंग फॉर आल के लिए बधाई देना चाहता हूँ। साथियों मुझे बताया गया की इस प्रोग्राम के माध्यम से लोगों को  90 दिनों मे लिटरेट बनाया जा सकता है मै आशा करता हूँ इससे बड़ी संख्या में लोग जुड़ेंगे और इसे सपोर्ट के लिए आगे आएंगे।”

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